कलेक्टर कार्यालय के सामने खुलेआम ‘मौत का कारोबार’, प्रशासन मौन
“पब्लिक टॉकिज संवाददाता”
कोण्डागांव। शहर में वर्षों से बिना लाइसेंस इलाज कर रहे फर्जी डॉक्टर निखिल सिकदार की लापरवाही ने आखिरकार एक बुजुर्ग की जान ले ली। आड़काछेपड़ा वार्ड निवासी बलराम बंजारे (60) की मौत ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश की लहर फैला दी है।

फोटो – मृतक बालाराम बंजारे
परिजनों के अनुसार, मृतक बलराम बंजारे मामूली टॉन्सिल की शिकायत लेकर फर्जी डॉक्टर निखिल सिकदार के पास इलाज के लिए पहुंचे थे, जहां एक इंजेक्शन लगने के तुरंत बाद उनकी हालत बिगड़ गई। मुंह से झाग निकलने लगे और वह बेहोश हो गए। आनन-फानन में निखिल ने खुद के वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने बलराम को मृत घोषित कर दिया।

फोटो – झोलाछाप डॉक्टर निखिल सिकदार
मृतक के परिजनों दिनेश और विशाल बंजारे का कहना है कि निखिल सिकदार कलेक्टर कार्यालय के सामने वर्षों से अवैध रूप से इलाज कर रहा है। उसकी पत्नी स्वास्थ्य विभाग में एएनएम पद पर कार्यरत है और इसी सरकारी छवि की आड़ में उसने झोलाछाप इलाज का धंधा चला रखा है। इस अवैध गतिविधि को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से उसके हौसले बुलंद होते गए।
घटना के बाद निखिल सिकदार ने कैमरे के सामने इंजेक्शन लगाने की बात कबूल की, साथ ही यह भी माना कि उसके पास कोई वैध चिकित्सा लाइसेंस नहीं है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
परिजनों ने एक वीडियो भी सार्वजनिक किया है जिसमें बलराम घटना से कुछ घंटे पहले पूर्णतः स्वस्थ नजर आ रहे हैं। यह वीडियो उनकी अचानक मौत पर संदेह को और गहरा करता है।
अब समाज और परिजनों ने प्रशासन से यह मांग की है कि निखिल सिकदार पर गैर इरादतन हत्या (IPC 304) का मुकदमा दर्ज किया जाए और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत की भी जांच हो। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस लापरवाही पर कब और कैसी कार्रवाई करता है।
