“पब्लिक टॉकीज संवाददाता”
कोंडागांव। कोंडागांव से महज 15 किलोमीटर दूर विकासखंड फरसगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत कोसागांव में संचालित 50 सीटर बालक आश्रम शाला इन दिनों गंभीर अव्यवस्थाओं का शिकार है। इस आश्रम में कुल 50 बच्चे रहकर अध्ययन करते हैं, लेकिन उनकी देखरेख और सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। आश्रम में अधीक्षक के पद पर नीरज कुमार ध्रुवंशी पदस्थ हैं, जिन्हें कोसागांव के साथ-साथ नीलजी बालक आश्रम छात्रावास का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया है।
आश्रम के प्यून के अनुसार अधीक्षक नीरज कुमार ध्रुवंशी रोजाना शाम करीब तीन-चार बजे आश्रम पहुंचते हैं और दो-तीन घंटे रुकने के बाद लौट जाते हैं। रात होते ही पूरा आश्रम चौकीदार के भरोसे छोड़ दिया जाता है। सवाल यह है कि 50 बच्चों की जिम्मेदारी आखिर किसके कंधों पर है?
रात्रिकालीन व्यवस्था की बात करें तो कोसागांव बालक आश्रम में चौकीदार उग्रसेन दीवान ही एकमात्र जिम्मेदार नजर आते हैं। अधीक्षक की गैरमौजूदगी में बच्चों की सुरक्षा, अनुशासन और आपात स्थिति से निपटने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखती। हैरानी की बात यह है कि यह स्थिति आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त की जानकारी में होने के बावजूद जस की तस बनी हुई है।
दो अलग-अलग आश्रमों का प्रभार एक ही व्यक्ति को सौंपना अपने आप में विभागीय लापरवाही को उजागर करता है। एक अधीक्षक आखिर कैसे दो स्थानों पर रहकर बच्चों की निगरानी, देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है? यह व्यवस्था नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने का आसान तरीका प्रतीत होता है।
इसी बीच एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। पास के गांव कबोंगा में पदस्थ शिक्षक कोसागांव बालक आश्रम के चौकीदार क्वार्टर में डेरा जमाए हुए हैं। बताया जाता है कि उक्त शिक्षक रोजाना वहीं आकर रहते हैं, जबकि चौकीदार खुद कहीं और रात बिताने को मजबूर है। यह स्थिति न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।
अब सवाल यह है कि क्या आदिम जाति कल्याण विभाग कोंडागांव इस अव्यवस्था को दुरुस्त करेगा, या फिर नियमों को ठेंगा दिखाकर ऐसे ही आश्रमों का संचालन चलता रहेगा और बच्चों का भविष्य यूं ही दांव पर लगा रहेगा?
