वादे अधूरे रहने से भड़का कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन, 29 से 31 दिसंबर तक तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी हड़ताल; कोंडागांव सहित सभी जिलों में व्यापक असर
पब्लिक टॉकिज संवाददाता। कोण्डागांव। विधानसभा चुनाव से पहले “मोदी की गारंटी” के तहत किए गए वादों के पूरा न होने से नाराज छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने सोमवार से तीन दिवसीय निश्चितकालीन ‘कलम बंद–काम बंद’ आंदोलन शुरू कर दिया। फेडरेशन के आह्वान पर 120 से अधिक कर्मचारी संगठनों के बैनर तले शासकीय, दैनिक वेतनभोगी, संविदा एवं अनियमित कर्मचारी सड़कों पर उतरे। पहले ही दिन सभी जिला मुख्यालयों में हड़ताल का व्यापक असर दिखा।

कोंडागांव नगर के चौपाटी मैदान में जिले भर के सैकड़ों कर्मचारी-अधिकारी धरने पर बैठे और ‘मोदी की गारंटी लागू करो’ के नारे लगाए। आंदोलन के चलते स्कूल, कृषि विभाग, लोक निर्माण विभाग, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, तहसील कार्यालय, जनपद पंचायत सहित अधिकांश सरकारी दफ्तरों में कामकाज ठप रहा। कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा, जिससे शासन की कई योजनाएं प्रभावित हुईं और आमजन को असुविधा का सामना करना पड़ा।

फेडरेशन पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान कर्मचारियों की मांगों को गारंटी में शामिल कर सत्ता हासिल की गई, लेकिन सरकार बनने के बाद उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। इसी उपेक्षा के विरोध में प्रदेशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
फेडरेशन की 11 सूत्रीय प्रमुख मांगों में केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता व एरियर का भुगतान, चार स्तरीय समयमान वेतनमान, वेतन विसंगतियों पर पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक कर लिपिकों, शिक्षकों व स्वास्थ्य कर्मियों की विसंगतियां दूर करना, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ, दैनिक वेतनभोगी व संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, 300 दिनों का अर्जित अवकाश नगदीकरण, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, अनुकंपा नियुक्ति नियमों का सरलीकरण तथा सेवा निवृत्ति आयु 65 वर्ष किए जाने की मांग शामिल है। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि 31 दिसंबर तक मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
