“पब्लिक टॉकीज” संवाददाता
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोंडागांव अंतरराज्यीय बस स्टैंड की उपेक्षा को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की है। कोर्ट ने सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से हलफनामे के माध्यम से जवाब मांगा है। सचिव को स्पष्ट करना होगा कि इस बस स्टैंड को चालू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और यह अब तक वीरान क्यों पड़ा है।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने इस मामले में जनहित याचिका दर्ज की है। यह याचिका रायपुर के एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित समाचार के आधार पर पंजीकृत की गई। खबर में बताया गया था कि 6.51 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कोंडागांव बस स्टैंड पिछले दो वर्षों से बंद पड़ा है। उपयोग में न होने के कारण यह स्थान असामाजिक तत्वों और अपराधियों का अड्डा बन गया है, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों को असुविधा हो रही है।
हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि बस स्टैंड की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही, इसे चालू करने के लिए अब तक उठाए गए कदमों का पूरा विवरण दिया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस परियोजना में किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई है, तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
कोंडागांव की जनता लंबे समय से इस बस स्टैंड के चालू होने की मांग कर रही है। आम यात्रियों की सुविधा के लिए इसे तैयार किया गया था, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह अनुपयोगी बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह बस स्टैंड चालू हो जाए तो क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था में सुधार होगा और लोगों को राहत मिलेगी। हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि सरकार जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
