कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में दशहरा पर्व की अपनी अनूठी परंपराएं हैं। फरसगांव विकासखंड की अंतिम ग्राम पंचायत मैनपुर में विजयादशमी के चार दिन बाद दशहरा मनाया जाता है। इस अनोखे आयोजन को देखने कोंडागांव के अलावा नारायणपुर और कांकेर जिले से भी हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। इस बार बिच्छू, मगरमच्छ और हेलीकॉप्टर की आकर्षक झांकियां लोगों के बीच चर्चा का केंद्र रहीं।
मैनपुर के दशहरे की खास पहचान यहां के युवाओं द्वारा तैयार की जाने वाली अनूठी झांकियां हैं। इस वर्ष भी युवाओं ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन करते हुए तरह-तरह की झांकियां सजाईं। पारंपरिक वेशभूषा में सजे पात्रों के साथ बिच्छू, मगरमच्छ और हेलीकॉप्टर की झांकियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। खासकर हेलीकॉप्टर की झांकी बच्चों और बड़ों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही।
गांव के लोग मिलकर करते हैं आयोजन
मैनपुर के दशहरे की सबसे खास बात यह है कि इसका आयोजन ग्रामीण स्वयं करते हैं। आयोजन के लिए गांव के लोग घर-घर जाकर चंदा एकत्रित करते हैं और उसी राशि से रावण का निर्माण, झांकियों की सजावट तथा अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कोई 100 रुपये तो कोई 1,000 रुपये तक सहयोग देता है। सामूहिक सहयोग से आयोजित यह पर्व गांव की एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक बन गया है।
मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर पर निकली राक्षसों की टोली
रावण दहन के आयोजन में राक्षसों की टोली मोटरसाइकिल से लेकर ट्रैक्टर तक पर सवार होकर निकलती है। इस अनूठे दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। आयोजकों और स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष दशहरा देखने के लिए लगभग 10 हजार से अधिक लोग मैनपुर पहुंचे।
भले ही मैनपुर में दशहरा पारंपरिक तिथि से चार दिन बाद मनाया जाता है, लेकिन ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बनता है। युवाओं की मेहनत और ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से जीवंत यह परंपरा बस्तर अंचल की सांस्कृतिक विविधता और लोक उत्सवों के प्रति लोगों की आस्था को दर्शाती है।
