दंतेश्वरी माता के हीरे-जवाहरात से जुड़ी है स्थानीय मान्यता, नगाड़े की तरह इस्तेमाल किए जाने की भी कही जाती है बात
कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में आस्था, परंपरा और रहस्यमयी मान्यताओं से जुड़े कई ऐसे स्थल हैं, जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इन्हीं में से एक है कोंडागांव जिले के बड़े डोंगर स्थित भैंसादोंद पहाड़, जहां मौजूद एक विशेष पत्थर इन दिनों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोग इसे टुनटुनी पखना, कौड़ी ढूसी और नगाड़ा पत्थर के नाम से जानते हैं।
इस पत्थर को लेकर स्थानीय स्तर पर कई मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि दंतेश्वरी माता ने अपने हीरे-जवाहरात और अन्य कीमती वस्तुओं को इस पत्थर में सुरक्षित रखा था। पुराने समय में कौड़ियों के प्रचलन की मान्यता से इसे माता का कौड़ी ढूसी भी कहा जाता है। वहीं, पत्थर से अलग-अलग प्रकार की ध्वनियां निकलने के कारण इसका नाम टुनटुनी पखना पड़ा।
राजाओं के समय संदेश पहुंचाने में होता था इस्तेमाल!
स्थानीय निवासी रामकुमार पात्र के अनुसार, मान्यता है कि राजाओं के जमाने में इस पत्थर का उपयोग नगाड़े की तरह किया जाता था। इसके माध्यम से जनता तक संदेश पहुंचाए जाते थे। हालांकि, इस मान्यता की ऐतिहासिक पुष्टि के लिए प्रमाणों और शोध की आवश्यकता है।
मनोकामना पूरी होने की आस में चिपकाते हैं सिक्के
भैंसादोंद पहाड़ पर स्थित यह पत्थर श्रद्धालुओं की आस्था से भी जुड़ा हुआ है। मान्यता के अनुसार, भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं और पत्थर पर सिक्के चिपकाते हैं। स्थानीय विश्वास है कि जिन श्रद्धालुओं के सिक्के पत्थर पर चिपक जाते हैं, उनकी मनोकामनाएं माता सुन लेती हैं।
कुल मिलाकर, टुनटुनी पखना यानी कौड़ी ढूसी पत्थर बड़े डोंगर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का एक रोचक हिस्सा है। यहां आने वाले श्रद्धालु दंतेश्वरी माता के दर्शन के साथ इस अनोखे पत्थर को भी देखने पहुंचते हैं। इससे निकलने वाली ध्वनियां और इससे जुड़ी जनश्रुतियां लोगों की जिज्ञासा बढ़ाती हैं। आस्था और इतिहास के इस अनूठे संगम को समझने के लिए स्थानीय मान्यताओं के साथ इसके वैज्ञानिक और ऐतिहासिक पहलुओं पर शोध भी महत्वपूर्ण है।
