बड़े डोंगर में नवरात्रि के दौरान निभाई जाने वाली जोगी बिठाई की रस्म बस्तर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की महत्वपूर्ण पहचान है। स्थानीय जानकार रामकुमार पात्र ने बड़े डोंगर और जगदलपुर के बस्तर दशहरा में कई समानताओं का उल्लेख किया है।
कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के कोंडागांव जिले स्थित बड़े डोंगर का मां दंतेश्वरी मंदिर धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां नवरात्रि के दौरान निभाई जाने वाली जोगी बिठाई की रस्म बस्तर दशहरा की परंपराओं से कई समानताएं रखती है। स्थानीय जानकार रामकुमार पात्र के अनुसार, बड़े डोंगर और जगदलपुर में नवरात्रि तथा दशहरा से जुड़ी कई रस्में समान विधि-विधान से निभाई जाती हैं।
रामकुमार पात्र बताते हैं कि दुर्गा सप्तशती में वर्णित विधि-विधान के अनुरूप यहां पूजा-पाठ किया जाता है। नवरात्रि के पहले दिन विभिन्न जातियों के प्रमुख लोग एकत्र होकर माता से प्रसाद के रूप में पर्व मनाने की अनुमति लेते हैं। इसी तरह जगदलपुर में बस्तर का राजपरिवार माता काछन देवी से दशहरा मनाने की अनुमति प्राप्त करता है। इसके बाद पर्व की शुरुआत होती है।
बड़े डोंगर की एक अन्य विशेष परंपरा प्रथम ज्योति प्रज्वलित करने से जुड़ी है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, पहली ज्योति चकमक पत्थर से आग उत्पन्न कर जलाई जाती है और उसी से अन्य ज्योतियां प्रज्वलित की जाती हैं।
रामकुमार पात्र के मुताबिक, जोगी बिठाई की रस्म भी बड़े डोंगर और जगदलपुर की परंपराओं की महत्वपूर्ण समानता है। इसमें हल्बा समुदाय का साधक नौ दिनों तक एक ही स्थान और आसन पर बैठकर निराहार रहते हुए माता की आराधना करता है। यह साधना तपस्या, संयम और देवी के प्रति समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।
बड़े डोंगर का ऐतिहासिक संबंध बस्तर की पुरानी राजधानी और मां दंतेश्वरी की आराधना से भी रहा है। हालांकि, इस परंपरा की शुरुआत की सटीक तिथि और दोनों स्थानों की रस्मों के ऐतिहासिक संबंधों की स्वतंत्र दस्तावेजी पुष्टि आवश्यक है। धार्मिक अनुष्ठानों की ये समानताएं बस्तर की समृद्ध लोकसंस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही आस्था को दर्शाती हैं।
