कोंडागांव। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाते हुए सोमवार को राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रवि घोष के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में लिए गए निर्णयों की स्वतंत्र एवं व्यापक समीक्षा कराने की मांग की गई।
ज्ञापन में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की बहु-सदस्यीय व्यवस्था में लिए गए कुछ निर्णयों को लेकर अन्य चुनाव आयुक्तों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं। हालिया मीडिया रिपोर्टों में भी चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा करीब 10 महीनों में विभिन्न निर्णयों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।
कांग्रेस ने SIR के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच तथा महत्वपूर्ण बदलावों का पारदर्शी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही निर्वाचन आयोग की IT प्रणाली, ECINet और ERONet से जुड़े डेटा के केंद्रीकरण की स्वतंत्र समीक्षा एवं सुरक्षा ऑडिट की मांग भी रखी गई। Form-6 में SIR से जुड़े बदलावों को लेकर भी दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि निर्वाचन आयोग ने इन रिपोर्टों के बीच कहा है कि SIR सहित सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए।
दूसरे ज्ञापन में कांग्रेस ने राष्ट्रपति से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने अथवा उनके विरुद्ध संसद में प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। साथ ही कथित अनियमितताओं, चुनावी डेटा के केंद्रीकरण और मतदाता सूची से जुड़े मामलों की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग रखी गई।
ज्ञापन में अनुच्छेद 324, निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता तथा 2023 के Anoop Baranwal फैसले का भी उल्लेख किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित संवैधानिक प्रश्नों पर निर्णय दिया गया था।
कांग्रेस ने कहा कि मतदाता अधिकारों की रक्षा और निर्वाचन प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करना आवश्यक है। ज्ञापन में सभी संबंधित मामलों की स्वतंत्र जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया।
