31 मार्च 2026 को नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य तय हुआ, लेकिन सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही की तारीख कौन तय करेगा?
कोंडागांव। कभी नक्सलगढ़ के नाम से पहचाने जाने वाले इलाकों में अब सड़कें पहुंच रही हैं, पुल-पुलियों का विस्तार हो रहा है और लोग बिना खौफ के आवाजाही कर रहे हैं। कोंडागांव से बयानार तक करीब 30 किलोमीटर का सफर भी अब पहले की तुलना में आसान हुआ है। लेकिन सवाल यह है कि जब सड़कें पहुंच गईं, तो सरकारी व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर कब पहुंचेगी?
बयानार आसपास के दर्जनों गांवों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी बुनियादी जरूरतों का प्रमुख केंद्र है। कोंडागांव जिले और नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के इस इलाके का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीणों के लिए बेहद अहम है। मगर यहां स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है।
अस्पताल में मरीज मौजूद, कर्मचारी नदारद!
मंगलवार शाम करीब साढ़े पांच बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का जायजा लेने पर मरीज तो नजर आए, लेकिन स्वास्थ्यकर्मी दिखाई नहीं दिए। सूचना पटल पर दर्जनों कर्मचारियों के नाम जरूर चस्पा थे, मगर मौके पर उनकी मौजूदगी नजर नहीं आई। यानी कागजों पर पूरा अस्पताल आबाद, लेकिन हकीकत में मरीजों को इलाज के लिए इंतजार!
प्रसव के बाद भर्ती दंपत्तियों ने बताया कि वे बीती रात से अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन वहां नियमित रूप से कोई मौजूद नहीं रहता। कुछ मरीजों ने भी कर्मचारियों के नहीं मिलने की बात कही और निजी डॉक्टर से इलाज कराने की मजबूरी जताई।
ड्यूटी भी आपसी अंडरस्टैंडिंग से!
स्टाफ क्वार्टर में रह रहे आयुष मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रभंजन पुरोहित से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि सप्ताह में तीन दिन महेंद्र पोयाम जिम्मेदारी संभालते हैं और तीन दिन वे खुद देखते हैं। उनके मुताबिक, आपसी अंडरस्टैंडिंग से व्यवस्था चल रही है।
हालांकि, अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में स्वीपर गणेश सोरी द्वारा मरीजों का इलाज किए जाने का दावा भी सामने आया है। इस वीडियो और आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
अब बहाना क्या होगा?
पहले नक्सलवाद का हवाला देकर कर्मचारियों की अनुपस्थिति की शिकायतें सामने आती थीं। अब जब सड़कें बेहतर हुईं और आवाजाही आसान हुई, तो स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना और भी जरूरी हो गया है।
यहां भवन या बुनियादी ढांचे से ज्यादा सवाल मानव संसाधन और जवाबदेही पर उठ रहे हैं। हालांकि, संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
नक्सलवाद के खात्मे के साथ विकास की उम्मीदें बढ़ी हैं। अब जरूरत है कि बयानार के अस्पताल में भी इलाज समय पर मिले और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित हो।
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