कोंडागांव। झाटीबन की पहाड़ी गुफा में विराजमान मां लिंगेश्वरी का दरबार साल में एक दिन खुलते ही श्रद्धालुओं से पट गया। गुफा के दर्शन के लिए छत्तीसगढ़ समेत देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर समिति के अनुसार इस वर्ष करीब 80 हजार से 1 लाख श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किए।
भारी बारिश भी श्रद्धालुओं की आस्था नहीं डिगा सकी। दर्शन के लिए करीब 5 किलोमीटर लंबी कतार लगी रही। कई श्रद्धालु दो से तीन दिन पहले ही पहुंचकर कतार में डटे रहे। नि:संतान दंपतियों की भी बड़ी संख्या रही, जो संतान प्राप्ति की कामना लेकर मां के दरबार पहुंचे।
बस्तर महाराजा कमलचंद भंजदेव भी धर्मपत्नी के साथ मां लिंगेश्वरी के दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने गुफा में विधिवत पूजा-अर्चना की।
मंदिर के पुजारी के अनुसार गुफा में प्रवेश करते ही शेर के पदचिह्न दिखाई देते हैं। स्थानीय मान्यता में इन्हें अच्छी बारिश, अच्छी फसल और सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है।
मंदिर समिति के अनुसार पिछले वर्ष संतान प्राप्ति की कामना लेकर पहुंचे दंपतियों के यहां जन्मे बच्चों समेत इस वर्ष 1500 बच्चों का पंजीयन किया गया। मान्यता है कि नि:संतान दंपति मां के दर्शन के बाद खीरा प्रसाद को पति-पत्नी साथ बैठकर हाथ के नाखून से काटकर ग्रहण करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इससे मां लिंगेश्वरी उनकी संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी करती हैं।
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए। स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। देर रात 12 बजे तक दर्शन का सिलसिला चलता रहा। इसके बाद श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर विधिवत पूजा-अर्चना के साथ गुफा के द्वार पुन: बंद कर दिए गए।
एक दिन का दरबार, लाखों की आस्था—मां लिंगेश्वरी के दरबार में इस वर्ष भी आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला।
